रामलीला में बाली वध, सीता खोज, हनुमान द्वारा समुद्र लांघना एवं लंका दहन का सजीव चित्रण

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श्री राम कथा मंचन समिति लाजपत नगर मुरादाबाद के तत्वधान में रामलीला मैदान के भव्य रंगमंच पर श्री बृज लोक लीला संस्थान वृंदावन के स्वामी घनश्याम भरद्वाज के कुशल निर्देशन में नवीन साज सज्जा एवं नवीन प्रसंग के साथ आज की लीला में शबरी मिलन, राम हनुमान सुग्रीव मित्रता बाली वध सीता खोज, हनुमान द्वारा समुद्र लांघना, एवं लंका दहन का सजीव चित्रण किया गया‌। पर्दा खुलता है राम लक्ष्मण सीता की खोज में वन वन भटक रहे हैं वह वन के पक्षियों जानवरों पेड़ पौधों नदिया तालाबों से बार-बार पूछ रहे हैं क्या तुमने मेरी सीता को कहीं देखा है और वह रोते बिलखते हुए वन वन भटक रहे हैं भटकते भटकते वह शबरी के आश्रम पहुंचते हैं जो शबरी वर्षों से राम का इंतजार कर रही है राम को अपने सामने खड़ा देख आनंदित हो जाती है और उसकी कुटिया में जो कुछ बेर होते हैं वह उनकी सेवा में अर्पण करती है और वह उन वीरों को खुद चखकर राम को खिलाती है। और वह राम को बताती है कि आप ऋषि मुख पर्वत की ओर जाएं वहां आपको कुछ वानर मिलेंगे वह आपकी सहायता करेंगे और राम ऋषि मुख पर्वत की ओर चल देते हैं। पर्वत पर सुग्रीव हनुमान नल नील जामवंत बैठे होते हैं तभी ऊपर से वह देखते हैं की दो राजकुमार हमारी ओर चले आ रहे हैं तब वह हनुमान से कहते हैं तुम जाकर देखो यह कौन है कहीं यह वाली के भेजे हुए दूत तो नहीं हनुमान जी भेष बदलकर उनसे मिलते हैं और राम लक्ष्मण का परिचय पाते ही असली रूप में आ जाते हैं और उन्हें कंधे पर बिठाकर सुग्रीव के पास ले आते हैं तब वहां राम और सुग्रीव की मित्रता होती है और सुग्रीव की कहानी सुनकर किशकिंधा का राजा बना देते है और बाली का वध करने का निश्चय करते हैं। सुग्रीव को बाली के पास युद्ध करने के लिए भेजते हैं और पेड़ की ओट में खड़े होकर तीर चला देते हैं जिससे बालि का वध हो जाता है। कुछ समय पश्चात वानर सेना सीता माता की खोज के लिए निकल पड़ती है और हनुमान जी सौ योजन का समुद्र लांघ कर लंका पहुंच जाते हैं सीता माता की खोज करते हैं। महेश चंद्र अग्रवाल, विनोद सक्सेना, श्याम कृष्ण रस्तोगी, मुकुल बंसल, राजेंद्र अग्रवाल, शरद अग्रवाल, राम कुमार गुप्ता, विवेक शर्मा ,राजेंद्र खन्ना, अतुल अग्रवाल, विपिन जेटली आदि ने सक्रिय सहयोग दे कर कार्यक्रम को सफल बनाया।

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