भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से होती है मुक्ति: धीरशान्त

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Jagranujala.com, मुरादाबाद।

  गणेश महोत्सव में हरिनाम संकीर्तन एवं भजन संध्याओं का आयोजन विवेक विहार, शाहपुर रोड और शिवपुरी में हुआ जिसमें कथा व्यास एवं भजनोपदेशक धीरशान्त दास अर्द्धमौनी ने भजनों एवं प्रवचनों की अमृतवाणी से भाव-विभोर कर दिया।
     उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति करने से मनुष्य तुरन्त ही अहैतुक ज्ञान तथा संसार से वैराग्य प्राप्त कर लेता है। यमराज ने अपने दूतों से कहा कि तुम लोग केवल उन्हीं पापी पुरुषों को मेरे पास लाना जिनकी जीभ कृष्ण के नाम तथा गुणों का कीर्तन नहीं करती, जिनके हृदय कृष्ण के चरणकमलों का एक बार भी स्मरण नहीं करते तथा जिनके सिर एक बार भी भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष नहीं झुकते। मेरे पास उन लोगों को भेजना जो भगवान विष्णु के प्रति अपने उन कर्तव्यों को पूरा नहीं करते जो मानव जीवन के एकमात्र कर्तव्य हैं। ऐसे सभी मूर्खो तथा धूर्तो को मेरे पास लाना।


     कृष्णभावनामृत इतनी दिव्य सुन्दर वस्तु है कि इसके प्रभाव से भौतिक भोग स्वतः नीरस हो जाता है | यह वैसा ही है जैसे कोई भूखा मनुष्य प्रचुर मात्रा में पुष्टिदायक भोजन करके भूख मिटा ले | महाराज अम्बरीष भी परम योगी दुर्वासा मुनि पर इसीलिए विजय पा सके क्योंकि उनका मन निरन्तर कृष्णभावनामृत में लगा रहता था।
     कलियुग दोषों का सागर है फिर भी इस युग मे एक अच्छा गुण है-केवल हरे कृष्ण मन्त्र का कीर्तन करने से मनुष्य भवबन्धन से मुक्त हो जाता है और दिव्य धाम को प्राप्त होता है।
     संकीर्तन में डा० जे० के० सिंह, विजेता सिंह, पूजा तनेजा, प्रिंस तनेजा, सीमा अरोड़ा, हेमा अरोड़ा, शीतू अरोड़ा, टिया अरोड़ा, सतीश अरोड़ा, अन्नू, मन्नू एवं इतिन अरोड़ा आदि ने सहभागिता की।

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